संतान प्राप्ति समस्या समाधान
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कुंडली में पंचम भाव संतान का भाव होता है। इस भाव पर पाप ग्रहों का प्रभाव, ग्रह दोष, या अन्य ज्योतिषीय कारणों से संतान प्राप्ति में देरी या समस्या आ सकती है।
⚠️ ज्योतिषीय कारण
- पंचम भाव पर पाप ग्रह का प्रभाव
- पंचमेश की कमजोर स्थिति
- बृहस्पति (गुरु) का अशुभ प्रभाव
- पुत्र बाधक योग
- नंदी पितृ दोष
- सर्प/कालसर्प दोष
🔥 संतान प्राप्ति के लिए उपाय
- ✅ कुंडली विश्लेषण: पंचम भाव और बृहस्पति का गहन अध्ययन
- ✅ संतान गोपाल पूजा: श्री कृष्ण की विशेष पूजा
- ✅ पुंसवन संस्कार: गर्भधारण के बाद विशेष संस्कार
- ✅ पितृ दोष निवारण: यदि पितृ दोष हो
- ✅ बृहस्पति शांति: गुरु ग्रह की पूजा
- ✅ संतान यंत्र: विशेष यंत्र की स्थापना
🙏 प्रसिद्ध संतान मंदिर
- संतान गोपाल मंदिर, काशी
- दक्षिणेश्वर काली मंदिर
- वैष्णो देवी मंदिर
- महालक्ष्मी मंदिर, कोल्हापुर
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- क्या कुंडली से संतान योग पता चलता है?
हाँ, कुंडली में पंचम भाव, पंचमेश और बृहस्पति की स्थिति से संतान योग का पता चलता है।
- संतान गोपाल पूजा क्या है?
यह बाल गोपाल (श्री कृष्ण) की विशेष पूजा है जो संतान प्राप्ति के लिए की जाती है। इसमें मंत्र जाप, हवन और विशेष अनुष्ठान शामिल हैं।
- कितने दिन में परिणाम मिलता है?
यह ग्रह दशा और समस्या की गंभीरता पर निर्भर करता है। कुछ मामलों में 3-6 महीने में, कुछ में 1 वर्ष या अधिक समय लग सकता है।
- क्या दोनों पति-पत्नी की कुंडली देखनी होगी?
हाँ, संतान योग के लिए दोनों की कुंडली देखना बेहतर है क्योंकि दोनों के ग्रह प्रभाव डालते हैं।
